Netaji Subhas Chandra Bose Biography in hindi

तुम मुझे खून दो में तुम्हे आजादी दूंगा इस तरह के क्रन्तिकारी नारे लगाने वाले भारत के महान देशभक्त

Subhas Chandra Bose उनके जीवन के बारे में हर कोई भारतीय नागंरिक जनता हे

किस तरह नेताजी ने भारतीय नांगरिको के मन में स्वराज की चाह जगा दी

और आजाद हिन्द सेना की स्थापना करके अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ स्वराज की जंग छेड़ दी

ऐसी कही सारी रोचक जानकारी इस लेख में जानेंगे नेताजी के जीवन के बारे में

इस लेख में हम क्या देखेंगे

  1. नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जीवन परिचय
  2. स्वराज(आजादी)की तयारी
  3. आजाद हिन्द सेना का निर्माण
  4. नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु(death)

नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जीवन परिचय (Netaji Subhas Chandra Bose Biography in hindi)

Subhas Chandra Bose का जन्म 23 जनवरी 1897 में उड़ीसा के कट्टक में हुआ था

उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस और माँ का नाम प्रभावती बोस था

नेताजी को 13 भाई बहन थे

उनके पिताजी जानकीनाथ बोस पेशे से एक वकील थे

नेताजी बचपन से ही पढाई में हुशार और अध्यात्म से जुड़े हुए थे

वे स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण परमहंस के विचारो से बचपन से ही काफी प्रभावित थे

और इन्ही महापुरषो के विचार से प्रेरित हो कर नेताजी को यह लगने लगा देश के हित में काम करना कितना जरुरी हे

नेताजी ने शुरवात की पढाई प्रोटेस्टैंट यूरोपियन स्कूल से की थी

और 1913 में मेट्रिक पास होने के बाद वे आगे की पढाई के लिए प्रेसीडेंसी कॉलेज में चले गए

उन्होंने 1918 में यूनिवर्सिटी ऑफ़ कलकत्ता से स्कॉटिश चर्च कॉलेज में BA की डिग्री हासिल की

स्कूल के दिनों से ही नेताजी के मन में देशभक्ति के बीज बोये गए थे

वे स्कूल के दिनों से ही अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आवाज उठाते थे

पर उनके इस तरह के विचार उनके पिताजी को पसंद नहीं थे और उनके पिता चाहते थे की वे कोई आछीसी जॉब करे

उसी दबाव में नेताजी को आगे की पढाई के लिए भारत छोड़ इंग्लैंड जाना पड़ा

कैम्ब्रिज युनिवेर्सिटी के एक कॉलेज में पढाई के बाद उन्होंने इंडियन सिविल सर्विसेस के एग्जाम में फोर्थ रैंक हासिल करली

इतनी अच्छी रैंक आने के बाद भी उन्हें अंग्रेजी सरकार के लिए नौकरी करना मंजूर नहीं था इसी लिए वह पोस्ट छोड़ दी

स्वराज(आजादी)की तयारी (Netaji Subhas Chandra Bose Biography in hindi)

Netaji Subhas Chandra Bose ने भारत आकर ब्रिटिश सरकार के खिलाफ बगावत की तैयारी शुरू कर दी

नेताजी भारतीय नागरिको को भड़का कर आजादी के लिए ब्रिटिश सरकार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित कर ने लगे

उन्होंने भारतीय नागरिको के बिच आजादी के बीज बोन के लिए एक न्यूज़ पेपर प्रिंट करना शुरू कर दिया

जिसका नाम था स्वराज

स्वराज में नेताजी अँग्रेजी हुकूमत के खिलाफ भड़कीले लेख लिखा करते थे जिसे पढ़कर हर नागरिक उनके खिलाफ स्वराज की जंग लड़ने के लिए तैयार हो यह इसके पीछे का मूल उद्देश्य था

और इन सब में उनके मार्गदर्शक बने थे चितरंजन दास https://en.wikipedia.org/wiki/Chittaranjan_Das

चितरंजन दास अपने देशभक्ति और भडकालू भाषण देने के लिए मशहूर थे

और नेताजी ने इन्ही के साथ मिलकर स्वराज की नीव रखी

Subhas Chandra Bose के देश के आजादी के प्रति काम देख कर उनको all india youth congres में शामिल कर लिया गया

1923 में नेताजी को all india youth congres का प्रेसिडेंट पद का पदभार सोप दिया

उनके काम को देख ब्रिटिश सरकार के नजर में नेताजी आने लगे

और स्वतंत्रता के लिए लोगो को उकसाने के जुर्म में उन्हें जेल में भी डाला गया

जेल में ही नेताजी को TB रोग का संकर्म भी हुआ था

1927 में जेल से रीहा होने के बाद वे पंडित जवाहर लाल नेहरू के संपर्क में आने लगे all india congres party के जनरल सेक्रेटरी का पदभार भी नेताजी को सौप दिया गया

आजाद हिन्द सेना का निर्माण

all india congres पार्टी को अछेसे चलाने के लिए नेताजी ने 1930 में यूरोप चले गए

और वहा जाकर वे कुछ बड़े नेताओ से मिले और उनसे पार्टी को अछेसे चलाने का गुन सीखा

इन्ही दिनों में सुभास चंद्र बोस ने अपनी किताब The Indian Struggle को पब्लिश किया था

लंदन में पब्लिश किये गए इस किताब को ब्रिटिश सरकार ने बैन कर दिया

भारत वापस आते ही सुभास चंद्र बोस को कांग्रेस पार्टी का प्रेसिडेंट चुना गया

अहिंसा के रस्ते पर चल कर देश को आजादी देने वाले महात्मा गांधीजी नेताजी के हिंसा के रास्ते को पसंद नहीं किया करते थे

और यह बात जब उनको पता चली तो उन्होंने प्रेसिडेंट पद से इस्तीफा देना ही सही समजा

नेताजी ने कांग्रेस पार्टी के प्रेसिडेंट पद से इस्तीफा दे दिया

और इसके बाद नेताजी पूरी दुनिया में घूमने लगे और बड़े बड़े नेताओ को भारत स्वतंत्र की मांग करने लगे जिसकी वजसे अंग्रेजी हुकूमत पर दबाव बढ़ने लगा

दूसरे विश्वयुद्ध में अंग्रेज सरकार चाहती थी की भारत की आर्मी उनके लिए युद्ध लढे

पर इस बात का सुभास चंद्र बोस ने खुलके विरोध दर्शाया

उनके यह रवैये के कारन उन्हें जेल में भी डाला गया पर नेताजी ने जेल में रहकर भी इस निर्णय का विरोध दर्शाते हुए भूक हड़ताल की इस के कारन उन्हें सातवे दिन ही जेल से रिहा कर दिया

जेल से बहार आने के बाद नेताजी को उन्ही के घर में नजर बंद कर दिया गया

उसके बावजूद वे 16 जनवरी 1941 को पठान का हुलिया बनाकर वहा से फरार हो गए

और फिर भारत की आजादी का अपना सपना लेकर वह ब्रिटिश के दुश्मन देश जर्मनी चले गए

जर्मनी में हिटलर से मिलकर भारत को समर्थन देना का प्रस्ताव उनके सामने रखा

पर जर्मनी दूसरे विश्वयुद्ध में हार गया

जापान का समर्थन

जर्मनी दूसरे विश्वयुद्ध में हर के कारन हिटलर चाहकर भी भारत को समर्थन ना दे सके

इसी लिए नेताजी जर्मनी से पनडुब्बी में बैठ कर जापान चले गए

जापान के प्रधानमंत्री से मुलाकात कर के उनके सामने भी भारत स्वतंत्र का प्रस्ताव रख दिया

जापान के प्रधानमंत्री सुभाष चंद्र बोस के विचारो से प्रभावित हो कर उन्होंने यह प्रस्ताव को मंजूरी दिखा दी

और भारत को आर्थिक मदत और शस्त्र देने का वादा किया

जापान के साथ मिलकर नेताजी ने आजाद हिन्द सेना की स्थापना की

जिसे की लोग INA या इंडियन नेशनल आर्मी के नाम से भी जानने लगे

आजाद हिन्द सेना ने भारत के स्वतंत्र के लिए बहुत से काम किये

भड़कीले भाषण दे कर लोगो के दिल में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ बगावत की आग फैला दी

छोटीसी चिंगारी का रूप लेकर जन्मी आजाद हिन्द सेना अब बड़े ज्वाला का रुप लेने लगी और कही सारे लोग इस सेना से जुड़ने लगे

पर दूसरे विश्वयुद्ध में जापान की हुई हार के कारण आजाद हिन्द सेना को हतियार और आर्थिक मदत मिलना बंद हो गई

और न चाहते हुए भी सुभाष चंद्र बोस को आजाद हिन्द सेना को बंद करना पड़ा

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु(death)

देश के स्वराज के लिए लड़ते लड़ते नेताजी 18 ऑगस्ट 1945 में एक विमान दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई

नेताजी सिर्फ 48 साल की उम्र में ही अपना अधूरा सपना ले कर चले गए

पर आजादी के प्रति उनकी लगाई चिंगारी ने महज दो साल बाद 1947 को भारत को आजादी दिलाई

तो यह थी भारत के एक महान वीरपुरुष नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जीवनगाथा

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vaibhav deshmukh

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